Description
जमुना हर रोज अपने बाबा को चाक घुमाते और बर्तनों को आकार देते हुए देखती है।
जमुना भी चाक पर काम करना चाहती है।
पर क्या वो ये कर पाएगी?
publications@muskaan.org
₹50.00
Author(s): Maheen Mirza
Illustrator: Sagar Kolwankar
Co-published with: Eklavya
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जमुना हर रोज अपने बाबा को चाक घुमाते और बर्तनों को आकार देते हुए देखती है।
जमुना भी चाक पर काम करना चाहती है।
पर क्या वो ये कर पाएगी?