Description
दिसंबर 1992 – बाबरी मस्जिद विध्वंस – भोपाल में कर्फ़्यू – स्कूल बंद – मंडी और बाज़ार ख़ाली| छ: कहानियों के इस संकलन में भोपाल के युवा और उम्र-रसीदा अपनी यादों को ज़बान देते हैं। उस वक़्त बच्चे क्या गेम खेलते थे? सडकों और गलियों में क्या आवाज़ें आती थीं? लोगों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी कैसी थी? यही गुज़रा ज़माना नज़ाकत से इन कहानियों में गुंथा हुआ है। आज, जब इंसानियत की साझी बुनावट चीथड़ों में दिखती है, शायद यह कहानियाँ हमें याद दिलाएँ कि नफ़रत, डर और फूट की वजह से हमने कितना कुछ खोया है। एक गाँठ की तरह, यह अतीत हमारे ज़मीर में आज भी टसकता है।




